Friday, February 23, 2007

२३ फेब्रूवारी २००७

एक कश्ती सौ तूफ़ान
जाये तो जाये कहा
समझेगा कौन यहा
दर्दभरे दिल की जुबान ....

अत्यंत मधूर आणि हळव्या आवाजात गायलेलं गाणं.

लुट रहा था किसि का जहा
देखती रह गयी ये ज़मी
चुप रहा बेरहम आसमा
ए मेरे दिल कही और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूढ ले अब कोइ घर नया ...

अजून एक गाणं, उडत्या चालीतलं - पण तोच मधूर आवाज .....

गायक - तलत महमूद -

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