एक कश्ती सौ तूफ़ान
जाये तो जाये कहा
समझेगा कौन यहा
दर्दभरे दिल की जुबान ....
अत्यंत मधूर आणि हळव्या आवाजात गायलेलं गाणं.
लुट रहा था किसि का जहा
देखती रह गयी ये ज़मी
चुप रहा बेरहम आसमा
ए मेरे दिल कही और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूढ ले अब कोइ घर नया ...
अजून एक गाणं, उडत्या चालीतलं - पण तोच मधूर आवाज .....
गायक - तलत महमूद -
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